Lal Kile Ke Nirman mein kin kin samagri ka upyog kiya gaya hai

Lal Kile Ke Nirman mein kin kin samagri ka upyog kiya gaya hai | लाल किले का इतिहास | लाल किले का निर्माण | हिन्दी में 

दोस्तों आपने लाल किले के बारे में जरूर पढ़ा सुना होगा | आज हम आपको Lal Kile Ke Nirman mein kin kin samagri ka upyog kiya gaya hai | लाल किले का निर्माण आदि से जुड़ी सारी जानकारी देने जा रहे है |

लाल किला भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है | भारत को अंग्रेजी हुकूमत से आजादी मिलने के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरु जी ने सबसे पहले दिल्ली के लाल किले में तिरंगा फहराया था | हर साल दिल्ली के लाल किले में  15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष में प्रधानमंत्री द्वारा ध्वजारोहण किया जाता है |

लाल किले ने अंग्रेजी हुकूमत का दौर भी देखा है | सन 1940 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने दिल्ली चलो के नारे के साथ लाल किले पर तिरंगा फहराया | इस लाल किले में ही आजाद हिंद के फौज के अफसरों पर अंग्रेजों द्वारा मुकदमा भी चलाया गया था | इस मुकदमे में जवाहरलाल नेहरू,भूलाभाई देसाई, कैलाश नाथ काटजू, बचाव पक्ष के वकील थे |

लाल किले का निर्माण कब और किसने किया

 दिल्ली में स्थित यह लाल किला अपने इतिहास  के लिएकाफी जाना जाता है | भारत के सभी राज्यों, देश-विदेश से लोग लाल किला देखने के लिए आते हैं |  लाल किला  भारत के बड़े-बड़े दार्शनिक स्थलों में से एक है जिसे लाखों लोग देखना पसंद करते हैं |  दिल्ली का यह लाल किला किसी महल से कम नहीं है |  जिसकी सुंदरता लोगों को अपनी और आकर्षित करती है |

Lal Kile Ke Nirman mein kin kin samagri ka upyog kiya gaya hai |

 लाल किले की सिक्योरिटी बहुत ही टाइट है जिसकी निगरानी भारत की पुलिस प्रशासन करती है | लाल किले से जुड़ा इतिहास इस किले को काफी रोचक बनाता है | इस किले के कुछ स्थान ऐसे भी हैं जहां लोगों का जाना मना है | सरकार ने इस जगह पर जाने के लिए पाबंदी लगाई हुई है |

 दिल्ली में स्थित लाल किले में मुगलों का शासन था | लाल किले के बारे में यह कहा जाता है कि लाल किला पहले सफेद रंग का था | उस समय और बदलत मौसम के कारण यह फीका पड़ने लगा और टूटने लगा था | इसलिए इसे लाल रंग से रंगा गया | जिसे आज लाल किले के नाम से जानते हैं |

दिल्ली में स्थिति यह लाल किला 2007 में यूनेस्को वर्ल्ड हेरीटेज में शामिल किया गया था |

दिल्ली में लाल किले के सामने ही चांदनी चौक मार्केट है | किले के अंदर भी काफी बड़ा मार्केट लगता है | जहां लाल किले घूमने वाले पर्यटक के लिए खरीदने के लिए बहुत ही बड़ा बाजार है | जहां पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है इस बाजार को छता चौक कहते हैं | इसका मतलब ढका हुआ बाजार |

 दिल्ली का यह  लाल किला काफी बड़ा और खूबसूरत है |  दिल्ली का लाल किला अपने इतिहास से जुड़ी हुई बातें समेटे हुए आज भी अपने  जगह पर  टीका हुआ है | सन 1627 में मुगल शासक शाहजहां ने गद्दी संभाली | लाल किले को शाहजहां ने अपने द्वारा बनाए गए सभी महलों में से सबसे आकर्षक और सुंदर बनवाया बनवाना चाहते थे |

इस कारण शाहजहां अपनी राजधानी आगरा को दिल्ली ले आए शाहजहां 1638 में ही दिल्ली को अपनी राजधानी घोषित किया | मुगल बादशाह को नायाब और बड़ी-बड़ी इमारतों का निर्माण करने का बड़ा शौक था | मुगलों की राजधानी आगरा में थी | बादशाह ने दिल्ली को मुगल साम्राज्य की राजधानी बनाने का विचार किया और लाल किले के लिए तालकटोरा बाग और रायसीना पहाड़ी को चुना गया |

फिर इस राय को बदलकर लाल किले के निर्माण के लिए यमुना नदी किनारे खुले मैदानों को चुना गया | लाल किले का निर्माण कार्य कारीगर, शिल्पकार और  मजदूरों द्वारा किया गया | यह किला लगभग 10 साल में बनकर तैयार हुआ | लाल किले के बनने के बाद वहां पर एक शहर बसाया गया जिसे शाहजहानाबाद के नाम से जाना जाता था | और आज के समय में इस शहर को हम दिल्ली कहते हैं | लाल किले के बनने की खबर मिलने पर बादशाह ने लाल किले की बागडोर अपने हाथों में ले ली | 

लाल किले में स्थित अन्य इमारतें

किले की दीवार 60 फुट ऊंची और लाल किले के सामने की दीवार 110 फुट ऊंची है | लाल किले की दीवार आगरा की ताजमहल से 2 गुना आकार का है | लाल किले से जुड़ा हुआ सलीमगढ़ का भी किला है | इन दोनों किलों को एक पूल जोड़ता है |

सलीम गढ़ के किले का निर्माण शेरशाह सूरी के बेटे सलीम शाह सूरी ने सन 1546 में कराया था | लाल किले की प्राचीर का निर्माण औरंगजेब ने करवाया था | लाल किले के दक्षिण में दिल्ली दरवाजा है जो जामा मस्जिद की तरफ है | लाल किले में 5 दरवाजे थे | जिसमें मुख्य रुप से लहौरी दरवाजा था | लहौरी दरवाजे में प्रवेश करने के बाद छत्ता बाजार शुरू होता है |

कहा जाता है इस बाजार में एक समय हर तरह का सामान मिलता था और आज यह दर्शकों के लिए बड़ा आकर्षण का केंद्र है | किले के आगे जाने पर नक्कारखाना है | नक्कारखाने के दरवाजे को हथिया पोल के नाम से जानते थे इस दरवाजे का नाम हथियापोल इसलिए है कि दरवाजे के दोनों और हाथी की मूर्तियां थी |

नक्कारखाना दो मंजिलों का होने के साथ-साथ 70 फुट चौड़ा और 40 फुट पहुंचा है | यही शाहजहां दार और फारुख सियर का कत्ल किया गया था | इसके सामने दीवान-ए-आम है | जिस की सजावट उस समय इतनी थी कि उसका कोई मुकाबला नहीं था | आज भी इस जगह को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि दीवान-ए-आम की खूबसूरती कितनी होगी या रही होगी |

दीवां-ए-आम की दलान तीन तरफ से खुली हुई है | इसकी लंबाई 80 फुट, चौड़ाई 40 फुट है | इसकी छत की ऊंचाई 30 फुट है | ऐसी खूबसूरती से भरा नजारा दीवान-ए’-खास में भी देखने को मिलती है | यह इमारत संगमरमर से बनाई गई है | दीवान-ए-खास की दीवार की लंबाई 90 फुट और चौड़ाई 67 फुट है |

संगमरमर से बनी हुई इस इमारत की छत चांदी की हुआ करती थी | इसके बीच एक नहर थी | जिसे नहर-ए-बहिस्थ कहते थे | इसके अंदर का कमरा 48 फीट लंबा और 47 फुट चौड़ा है | जहां संगमरमर का चबूतरा भी है | शाहजहां से लेकर अंग्रेजी शासन तक के सफर में यह किला बहुत सी बातें लिए आज भी स्थित है |

लाल किले के उत्तर दिशा की ओर हीरा महल है जिन्हें बहादुर शाह ने बनवाया था | इस महल का निर्माण 1824 में किया गया था | उत्तर से दक्षिण की ओर लाल किले में और औरंगजेब ने मोती मस्जिद का निर्माण भी किया था | यह इमारत संगमरमर से बनी हुई एक खूबसूरत इमारत है |

मस्जिद में अंदर जाने के लिए पीतल का दरवाजा है | मस्जिद के ऊपर 3 गुंबद बने हुए हैं | इसके साथ ही लाल किले मे जफर महल का भी जिक्र होता है | इस महल को सन 1842 में बहादुर शाह जफर ने बनवाया था जिसे लाल पत्थर से बनाया गया है | इसके साथ मुमताज महल जो लाल किले के बड़े महलों में से एक था | इस महल को 1857 के बाद कैद खाना बना दिया गया | जहां कैदियों को रखा जाता था | अब यह महल एक संग्रहालय है |

लाल किले का निर्माण 

लाल किला बेहतरीन लाल बलुआ पत्थर से बनाया गया है | इस किले में बहुत से सुंदर महल, मस्जिद, और इमारतें हैं | इस किले को बहुत से सुंदर महल और इसमारतें हैं जिसकी सजावट सोने, चांदी, मोती, हीरो से किया गया था | आज के समय में यह चीजें तो नहीं है लेकिन इसकी छाप वहां आज भी स्थित है |

इस किले को किला-ए-मुबारक के नाम से भी जाना जाता था | लाल किले का निर्माण 1638 में शुरू हुआ था | यह किला 1648 में पूरी तरह बनकर तैयार हुआ | लाल किले की लंबाई 900 मीटर और चौड़ाई 550 मीटर है | लाल किला 2.4 किलो मीटर मैं फैला हुआ है | जो चारदीवारी से गिरा हुआ है | लाल किले का क्षेत्रफल 254.67 एकड़ है |

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