बाटला हाउस एनकाउंटर के बारे में सब कुछ हिंदी में | Batla House Encounter full details In Hindi | 2021

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batla house encounter delhi police

 

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बाटला हाउस एनकाउंटर 19-Sep-2008 को दिल्ली के जामिया नगर इलाके में इंडियन मुजाहिदीन के संदिग्ध आतंकियो के खिलाफ की गयी एक मुठभेड़ थी, जिसमे की दो संदिग्ध आतंकवादी आतिफ अमिन और मोहमद साजिद मारे गए थे, तथा दो अन्य संदिग्ध आतंकवादी सैफ मोहमद और आरिज खान भागने में सफल हो गए थे, जबकि एक और आरोपी जिसान को गिरफ्तार कर लिया गया था.

बाटला हाउस एनकाउंटर के बारे में सब कुछ हिंदी में.

दोस्तों वाटला हाउस एनकाउंटर के ठीक सात दिन पहले 13-Sep-2008 को दिल्ली के अलग अलग जगहों पर सीरियल ब्लास्ट हुए थे. दो बम कनॉट प्लेस में फटे थे. दो ग्रेटर कैलाश के एम ब्लॉक में और एक भीड़-भाड़ वाली जगह करोल बाग़ के गफ्फार मार्केट में फटा. उस दिन अलग अलग पांच जगह बम धमाके हुए थे. इनके अलावा पुलिस ने तीन बम और बरामद किये, जिन्हें डिफ्यूज कर दिया गया, इन पांच धमाकों में करीब 30 लोग मारे गए थे. ये सभी धमाके लगभग 50 मिनट के अंदर हुए थे.

दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम उन सीरियल बम धमाकों की जाँच कर रही थी, इसी के चलते वो टीम 19-Sep-2008 को वाटला हाउस में एल-18 नम्बर की इमारत की तीसरी मंजिल पर जा पहुंची, वही पर पुलिस की इंडियन मुजाहिदीन के संदिग्ध आतंकियों से मुठभेड़ हुए. इस मुठभेड़ में दो संदिग्ध की मौत हो गए. मरने वालो की पहचान मोहमद आतिफ अमिन और साजिद के रूप में हुई। दोनों आरोपी यूपी के रहने वाले थे, जबकि मोके से दो युवको को गिरफ्तार किया गया था. एक युवक मोके से किसी तरह से भाग निकला था.

कैसे हुआ था बाटला हाउस एनकाउंटर.

batla house encounter such

image credit- tribuneindia

सुबह 10:55 बजे दिल्ली पुलिस के एसआई धर्मेंद्र कुमार कोट-पैंट और टाई लगाकर फोन कंपनी के सेल्समैन का लुक बनाए हुए फ्लैट का गेट खटखटाने लगते है। खटखटाने की आवाज़ सुनकर अंदर सन्नाटा छा जाता है। एसआई धर्मेंद्र कुमार उनसे बात करना चाहते है लेकिन वो लड़के मना कर देते हैं और इतनी देर में वो वहां का मुआयना कर लेते हैं, और उन्हें चार लड़के कमरे में दिखाई देते हैं।

जिसके बाद दरवाजा बंद हो जाता है। बाकी पुलिस वाले नीचे इंतजार कर रहे होते है। इसी बीच इंस्पेक्टर शर्मा सीढ़ियां चढ़ने लगे। दो पुलिसकर्मी नीचे खड़े रहे। बुलेटपूफ्र जैकेट उनमे से किसी ने नहीं पहनी थी। जिसके पीछे की वजह बाद में पुलिस ने बताई थी कि गर्मी थी और साथ ही स्पेशल सेल वहां तफ्तीश के इरादे से गई थी। कहा जाता है कि इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा के दिमाग में ये था कि पांच-छह साधारण लड़के यहां पर रह रहे हैं और इनसे चलकर कड़ाई से पूछताछ करेंगे और पता करेंगे।

फोन कंपनी के सेल्समैन बनकर गए एसआई ने जब इशारा किया कि चार लड़के हैं तो सबसे आगे नेतृत्व करते हुए इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा उनके पीछ हेड काउंसटेबल बलविंदर और बाकी के लोग पीछ थे। ये एल-18 के चौथी मंजिल पर पहुंचकर दरवाजे को खटखटाते हैं लेकिन इस बार दरवाजा नहीं खुलता बल्कि सीधे अंदर से फायरिंग की आवाज आती है।

गोली जब चलती है तो इधर से क्रास फायरिंग होती है। गोली की आवाज सुनकर अलग-अलग मंजिल की सीढियों पर खड़े पुलिसवाले चौंक उठे। अचानक चली गोलियों में से दो गोली इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा को लगती है। एक उनके कंधे पर और एक पेट के पास। हवलदार बलवंत के हाथ में गोली लगी। गोली लगने के बाद इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा वहीं गिर जाते हैं।

mohan chand sharma encounter                                                                     image credit- ummid

उसके बाद एसआई धर्मेद्र और एक अन्य उन्हें कंधे पर उठाकर पास के ही होली फैमली हास्पिटल ले जाते हैं। उधर फायरिंग जारी रहती है। करीब आधे घंटे तक हो रही फायरिंग से आस-पड़ोस के लोग चौंक जाते हैं। नीचे मौजूद पुलिसवालें चीखकर सभी को घर से बाहर नहीं निकलने का निर्देष देते हैं। करीब आधे घंटे की गोलीबारी के बाद फ्लैट के रूम से आतिफ अमीन और साजिद की लाशें मिलती हैं।

मोहम्मद सैफ औऱ जिशान नामक दो लोगों को पकड़ा जाता है। कहा जाता है कि फायरिंग सुनकर कुछ लोग सीढ़ियों से नीचे भागने लगते है, इसका फायदा उठाकर कुछ आतंकी भाग जाते है। इधर मुठभेड़ में घायल इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा को नजदीकी होली फैमिली अस्पताल में भर्ती कराया जाता है, जहां आठ घंटे चले इलाज के बाद उनकी मौत हो जाती है। उनकी मौत अधिक खून बहने के कारण होती है।

पुलिस ने मोहन चंद्र शर्मा की मौत के लिए शहज़ाद अहमद को ज़िम्मेदार ठहराया। इलाके में अफरा-तफरी मच जाती है और भारी मात्रा में पुलिस फोर्स पहुंचती है। पीसीआर से जामिया नगर पुलिस चौकी को इस एनकाउंटर की खबर मिली। मेसेज फ्लैश कर दिया गया। फिर पुलिस की जांच शुरू हुई। उस फ्लैट को सील कर दिया जाता है। मानवाधिकार संगठनों ने एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए जांच की मांग की। इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा को 26 जनवरी, 2009 को मरणोपरांत अशोक-चक्र प्रदान किया गया।

इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा शहीद.

mohan chand sharma batla house

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इस एनकाउंटर का नेतृत्व कर रहे इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा को गोली लग गयी. इस एनकाउंटर का नेतृत्व कर रहे इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा को गोली लग गयी. उसी शाम होली फैमिली अस्पताल में ईलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी.
पोस्टमोर्टम रिपोर्ट के अनुसार शर्मा को तीन गोली लगी थी. एक गोली पेट में एक जांध पे और तीसरी गोली दाहिने हाथ में लगी थी. पुलिस ने इंस्पेक्टर की मौत का जिम्मेदार शहजाद अहमद को ठहराया था.

पुलिस ने 14 लोगो को किया था गिरफ्तार.

21 सितम्बर तक पुलिस ने इस मामले में कुल 14 लोगो को गिरफ्तार कर लिया था. जिनमे की एल-18 मकान की देखभाल करने वाला भी शामिल था. सभी गिरफ्तारियां दिल्ली और उत्तरप्रदेश से की गयी थी.

मानवाधिकार संगठनों ने फेक एनकाउंटर बताया था।

batla house fake protest

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इस एनकाउंटर को कुछ मानवाधिकार संगठनों ने फेक एनकाउंटर करार देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की और कहा इसकी न्यायिक जाँच की जाये।
इस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को दो महीनो में जांच कर के रिपोर्ट देने के लिए कहा था.

22-जुलाई-2009 को राष्ट्रीय मानवाधिकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपी जिसमे दिल्ली पुलिस को क्लीन चिट दी गई थी.

26-अगस्त-2009 को दिल्ली हाई कोर्ट ने इस एनकाउंटर के लिए न्यायिक जाँच के लिए इंकार कर दिया था. कोर्ट ने आयोग की रिपोर्ट को ही सही माना था.

30-अक्टूबर-2009 को कुछ लोगो ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सभी न्यायिक पहलुओं को जानने के बाद न्यायिक जाँच से इंकार कर दिया था।

 इंस्पेटर मोहन चंद शर्मा का मुख्य आरोपी गिरफ्तार.

दिल्ली पुलिस मोहन चंद शर्मा के कातिल की तलाश में कई जगह छापे मारी कर रही थी. आखिकार 6-february-2010 को पुलिस ने मोहन चंद शर्मा की हत्या के मुख्य आरोपी शहजाद अहमद को गिरफ्तार कर लिया था.

20-जुलाई-2013 को इन्स्पेटर मोहन शर्मा के कातिल शहजाद अहमद के मामले में कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली, और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.

25-जुलाई-2013 को इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा के क़त्ल के लिए शहजाद अहमद को दोषी करार दे दिया था।

30-जुलाई-2013 को शहजाद अहमद को उम्र कैद की सजा सुना दी गई.

क्या वाटला हाउस एनकाउंटर फेक था?

दोस्तों, बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद से ही इस एनकाउंटर के ऊपर लोगो का अलग अलग मत था. कुछ लोग इसे फेक बता रहे थे.
तो आईये जानते है की आखिर सच्चाई क्या है.

पुलिस ने बुल्लेट प्रूफ जैकेट नहीं पहने थे.

कुछ लोगो का मानना है की जब पुलिस को पहले से ही पता था की अंदर आतंकी हथियारों से लेस है तो बुल्लेट प्रूफ जैकेट क्यों नहीं पहना।

जब मीडिया ने ये सवाल दिल्ली पुलिस से किए तो दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त करनैल सिंह और डिप्टी आयुक्त (स्पेशल सेल) ने बयान दिए कि स्पेशल सेल की टीम के सदस्यों ने बुलेटप्रूफ़ जैकेटें नहीं पहनी थीं. क्योकि कारण ये है कि अगर इतनी तैयारी से पुलिस मौक़े पर छापा मारती तो इससे आतंकी अलर्ट हो जाते और शायद भाग जाते. इसलिए बाटला हाउस जैसे कम जगह वाले इलाक़े में पुलिस ने ऑपरेशन की गोपनीयता बनाए रखने के लिए ऐसा किया.
फिर दिल्ली पुलिस की ओर से एक और बयान आया.

जिसमे कहा गया कि स्पेशल टीम के सभी अधिकारियों ने बुलेटप्रूफ़ जैकेट पहनी हुई थीं, बस इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा ने नहीं पहनी थीं. और उनकी ही मौत इस एनकाउंटर में हुई थी. यहीं पर सवाल उठे कि दिल्ली पुलिस के एक ही अधिकारी ने जैकेट नहीं पहनी और वही अधिकारी पहले घायल हुआ, और फिर बुल्लट लगने की वजह से मारा गया. वो भी इन्स्पेक्टर शर्मा जैसे अधिकारी, जो पहले दर्जन भर से ज़्यादा मुठभेड़ों में शामिल रह चुके थे.

दिल्ली पुलिस की कार्यशैली पर यहां ये सवाल भी उठे कि अगर पुलिस की जानकारी पुख़्ता थी कि बाटला हाउस के फ़्लैट में आतंकी छिपे हुए हैं, तो भी पुलिस ने बुलेटप्रूफ़ जैकेट क्यों नहीं पहना?

आतंकियों के शरीर पर लगे घाव भी शक के दायरा में थे.

कुछ लोगो का कहना था की इस घटना में मारे गए दो कथित आतंकियों को दफ़नाए जाने के पहले दोनों को ही आख़िरी बार नहलाया गया था. इस दौरान उनकी तस्वीरें खींची गयीं थी. तस्वीरें अक्टूबर 2008 में बाटला हाउस में हुई जामिया के शिक्षकों के समूह की अगुवाई में हुई जन सुनवाई में सामने आयीं.

जिसमे की साजिद के सिर में ऊपर गोलियों के निशान थे. इस पर बात उठी कि साजिद के सिर पर मिले निशान ऐसे थे, जैसे उसे घुटनों के बल बिठाकर गोली मारी गयी हो. इस पर दिल्ली पुलिस का जवाब आया कि ऑपरेशन के दौरान साजिद सीने के बल लेटकर गोलियां चला रहा था, इस वजह से उस पर चली गोलियां सीधे उसके सिर में जाकर लगीं।

इंस्पेक्टर शर्मा की शर्ट पर खून के निशान नहीं थे.

लोगो का सबसे बड़ा सवाल इंस्पेक्टर शर्मा के घावों के बारे में था. घटनास्थल पर घायल होने के बाद इंस्पेक्टर शर्मा को पास ही के होली फ़ैमिली अस्पताल ले जाया गया था. बिल्डिंग से बाहर उन्हें दो लोग कंधे के सहारे बाहर ला रहे थे. इसकी एक तस्वीर भी है, लेकिन इस तस्वीर में इंस्पेक्टर शर्मा की क़मीज़ पर कहीं भी गोली लगने की वजह से घाव या ख़ून के धब्बे नहीं दिखाई दे रहे हैं. इंस्पेक्टर शर्मा को लगी गोली के निशान कहां थे?

इस पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि उन्हें गोली सामने से लगी थी और शरीर को बेधकर पीछे से निकल गयी थी इसलिए घाव और ख़ून के धब्बे पीछे की ओर थे, जो सामने से दिखायी नहीं दे रहे थे. इंस्पेक्टर शर्मा का पोस्टमोर्टम हुआ. जिसमे शर्मा के शरीर पर दो घाव बताए गए थे. और दोनों ही गोलियां पीछे से निकल गयी थीं.

बाटला हाउस एनकाउंटर मामले में आरिज खान दोषी करार.

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image credits – theindianexpress

आरिज खान को स्पेशल सेल ने नेपाल से गिरफ्तार किया था, आरिज पर कई जगहों पर बम धमाकों का आरोप है, जिनमे 165 लोग मारे गए थे.
आरिज खान की सजा पर 15 मार्च को 12 बजे बहस होगी।

आरिज खान को फांसी की सजा.

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने सोमवार को इंडियन मुजाहिदीन (IM) के आतंकी आरिज खान को मौत की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इसे रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस माना है। आरिज को दिल्ली में 2008 में हुए बाटला हाउस एनकाउंटर से जुड़े एक मामले में 8 मार्च को दोषी करार दिया था।

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